September 25, 2022

Maharaja Pravir chndra Bhanjdeo

महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी और महाराज प्रफुल्लचंद्र भंजदेव की दूसरी संतान प्रवीर चंद्र भंजदेव जो बस्तर रियासत काल के आखरी शाशक हुए इनका जन्म 25  जून 1929 को हुआ था। इनकी माता के बीमारी के समय रहस्यमय निधन के बाद लंदन में ही ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधियों के द्वारा 6 वर्षीय प्रवीर भंजदेव का राजतिलक कर दिया गया। बारह साल बाद जब प्रवीर 18  साल के हुए तब उन्हें पूर्ण रूप से राज्य अधिकार दिए गए। इसी साल सरदार वल्लभ भाई पटेल ने छत्तीसगढ़ के १४ रियासतों से बातचीत कर भारतीय सविधान में विलयन के हस्ताक्षर करा लिए थे। 15 अगस्त को देश स्वाधीन हुआ और  1  जनवरी  1948 को बस्तर रियासत का आधिकारिक रूप से विलयन हो गया। हांलाकि भारत एक संघीय राष्ट्र बन गया फिर भी बस्तर की जनता प्रवीर चंद्र को ही अपना राजा मानती रही। जनता के अपार समर्थन से वे 1957  में विधानसभा चुनाव जीते , और दो साल में ही अपना त्याग पत्र दे दिया। त्यागपत्र देते ही मनो सरकार उनकी दुश्मन हो गई और 11और 12 फरवरी 1961  को पहले उन्हें राज्य विरोधी होने के नाम पर गिरफ्तार किया गया और फिर बस्तर के अभूतपूर्व शाशक का अधिकार दे दिया गया। एक बार जब 25  मार्च 1966 को सुबह जब सैकड़ो लोग धनुष बाण लिए अलग अलग गावों से सालो से ही रही एक मांझी आखेट की परम्परा की स्वीकृति लेने राजमहल पहुंचे तो भीड़ को देखते ही आनन फानन में पुलिस द्वारा राजमहल को घेर लिया गया और आत्मसमपर्ण के लिए कहा गया परन्तु लोग कुछ समझ पाते इससे पहले ही पुलिस ने आंसू गैस छोड़ दी और गोलीचालन कर दिया जिसमे महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की मृत्यु हो गयी। इस तरह से आदिवासियों के हितो की रक्षा करते हुए बस्तर महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव ने अपने प्राण त्याग दिए , उनका यह बलिदान जनजातीय हितो के लिए अविसमरणीय रहेगा।