September 25, 2022

Rajmata krantrinetri swarn kuvar

अंग्रेजी शाशन काल में कई प्रकार के अत्या चार किये गए उनमे सबसे बड़ा अत्या चार था आदिवासियों का उत्पीड़न व बस्तर का दोहन, राजमाता स्वर्ण कुंवर बस्तर के पूर्व राजा भैरमदेव की दूसरी रानी थी, वे बस्तर के आंदोलन को मार्गदर्शन देने वाली प्रमुख नेत्री थी। लगभग सभी लड़ाइयों में उनका मार्गदर्शन रहता था, क्रन्तिकारी उनके सुझाव व सहायता से ही काम करते थे। बस्तर में पर्यावरण का सुरक्षित रखने में उनकी बड़ी भूमिका रही थी। कई स्थानों पर उन्होंने वृक्षारोपण करा और फलदार वृक्ष लगवाए थे। वे पर्यावरण प्रेमी थी , क्रांतिकारियों का उत्साह और उमंग जगाने वाली राजमाता को कई संघर्षो के बाद अंग्रेजो ने बंदी बना लिया तथा उन्हें रायपुर स्थित कारगार में भेज दिया जहाँ 1910 में उनकी मृत्यु हो गयी।