September 25, 2022

Babu Chote Lal Srivastava

बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव छत्तीसगढ़ के एक स्वतंत्रता सेनानी थे बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव दृढता और संकल्प के प्रतिक थे। छत्तीसगढ़ के इतिहास की प्रमुख घटना कंडेल नहर सत्यगृह के वह सूत्रधार थे। छोटेलाल श्रीवास्तव का जन्म 28 फरवरी 1889 को कांडले के एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। पं सुंदरलाल शर्मा और नारायणराव मेघावाले के संपर्क में आकर उन्होंने आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया। वर्ष 1915 में उन्होंने श्रीवास्तव पुस्तकालय की स्थापना की यहाँ राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत देश की सभी प्रमुख पत्र पत्रिकाए मंगवाई जाती थी। आगे चलकर धमतरी का उनका घर स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख केंद्र बन गया। वोह वर्ष 1918 में धमतरी तहसील राजनितिक परिषद के प्रमुख आयोजकों में से थे। छोटेलाल श्रीवास्तव को सर्वाधिक ख्याति कांडले नहर सत्याग्रह से मिली। अंग्रेजी सरकार के अत्याचार के खिलाफ संगठित जनशक्ति का यह पहला अभूतपूर्व प्रदर्शन था। वर्ष 1921  में सवदेशी प्रचार के लिए उन्होंने खादी उत्पादन केंद्र की स्थापना की। वर्ष 1922 में श्यामलाल सोम के नेतृत्व में सिहावा में जांगल सत्याग्रह हुआ। बाबू साहब उस सत्याग्रह में भरपूर सहयोग दिया। जब वर्ष 1930 में रुद्री के नजदीक नवागांव में जंगल सत्या गृह का निर्णय लिया गया , तब बाबू साहब की उसमें सक्रिय भूमिका रही। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जेल में उन्हें कड़ी यातना दी गयी। वर्ष 1933  में गाँधी जी ने पुनः छत्तीसगढ़ का दौर किया। वह धमतरी गए। वहाँ उन्होंने छोटे लाल बाबू के नेतृत्व की प्रशंशा की। वर्ष 1937  में श्रीवास्तवजी धमतरी नगर पालिका निगम के अधियक्ष निर्वाचित हुए। भारत छोड़ो आंदोलन में भी बाबू साहब की सक्रीय भूमिका थी। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कंडेल में 18  जुलाई 1976 को उनका देहवासन हो गया।